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Sunday, September 4, 2011

शहला मसूद.,तरूण विजय औऱ भाजपा


शहला मसूद हत्याकांड के बाद भाजपा के राश्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद तरूम विजय से उनके अंतरंग संबंधों को लेकर भाजपा बगले झांकने लगीहै....सीबीई को जांच सौपें जाने के बाद से ही राजधानी में अफवाहों का दौर जारी है
आरटीआई कार्यकर्ता के भाजपा के राश्ट्रीय नेताओं से गहरे संबंधों ने पार्टी के सामने मुश्किलें खडीं कर दी है वरिष्ट नेता लालकृष्ण अडवानी से व्यक्तिगत जान पहचान रखने वाली शेहला के भाजपा के साथ गहरे और निजी संबंधों पर चर्चा का बाज़ार गर्म है..रविवार को यह भी चर्चा आम रही की प्रदेश के मुख्यमंत्री औऱ सरकार की शेहला ने अक अगस्त को सीवीसी से शिकायत की ङै..इसकी जानकारी सीबीआई के हवाले से मिली है....लेकिन इसकी किसी तरह कोई पुष्टि नहीं हुई है..नैतिकता का पाठ पढाने वाली पार्टी के नेता चरित्र पर इस खुलासे के बाद प्रश्नचिंह लग गया है.....जिस पर पार्टी मौन है मामलों के छानबीन शुरू करने के पहले सीबीआई ने केसी हिस्ट्री का अध्ययन शुरू करदिया है....और इसके साथ ही कई तरह की चर्चाएं और अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया है....

Wednesday, June 15, 2011

हमभारत वासी.......

 कन्या भ्रूण हत्या, शिशु हत्या औरमानव तस्करी जैसी घटनाओं के कारण भारत को एक सर्वे में महिलाओं के लिए दुनिया में चौथा सबसे खतरनाक देश माना गया है।

महिला अधिकारों के लिए कानूनी सूचना और कानूनी सहायता केंद्र थॉमसन रॉयटर्स ट्रस्टलॉ विमिन की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार विश्व में अफगानिस्तान महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश है। इसके बाद डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया का नंबर आता है।

इस सूची के टॉप चार देशों में से तीन दक्षिण एशिया में हैं। इस सर्वेक्षण में इस क्षेत्र के 213 विशेषज्ञों को खतरों से जुड़े विभिन्न फैक्टर को ध्यान में रखते हुए देशों को सूचीबद्ध करने को कहा गया था।

इन एक्सपर्ट्स से देशों को सूचीबद्ध करते समय छह मुख्य खतरों की श्रेणियों को ध्यान में रखने को कहा गया था जिनमें स्वास्थ्य खतरे, यौन हिंसा, गैर यौन हिंसा, संस्कृति, परंपरा अथवा धर्म में पालन की जाने वाली हानिकारक प्रथाओं, आर्थिक संसाधनों तक पहुंच में कमी और मानव तस्करी शामिल है।

सर्वे में कहा गया, 'भारत कन्या भ्रूण हत्या, शिशु हत्या और मानव तस्करी के कारण इस सर्वे में चौथे स्थान पर है।' सर्वे के मुताबिक 2009 में भारत के गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने टिप्पणी की थी कि भारत में कम से कम 10 करोड़ लोग मानव तस्करी में शामिल हैं।

सीबीआई का अनुमान है कि 2009 में करीब 90 प्रतिशत मानव तस्करी देश के अंदर हुई तथा देश में करीब 30 लाख वेश्याएं थीं, जिनमें से 40 प्रतिशत बच्चे थे। अन्य तरह के उत्पीड़नों में जबर्दस्ती श्रम कराना और जबर्दस्ती विवाह शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार, 'भारत में माना जाता है कि पिछली सदी में कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या के कारण पांच करोड़ लड़कियों का अस्तित्व नहीं रहा।'

Thursday, June 9, 2011

हुसेन: प्रसिद्धि और विवादों से घिरे कलाकार

भारतीय पेंटिंग को ग्लोबल मंच तक पहुंचाने वाले पेंटरमकबूल फिदा हुसेन हिंदू देवी-देवताओं के चित्रण को लेकर कई बार विवादों में घिरे। समकालीन भारतीय कला के पर्याय हुसेन को फोर्ब्स मैगजीन भारत के 'पिकासो की संज्ञा दे चुकी है।

17 सितंबर, 1915 को महाराष्ट्र के पंढरपुर में जन्मे हुसैन ने पेंटिंग का कहीं से भी विधिवत प्रशिक्षण नहीं लिया था। अपने कला जीवन की शुरुआत उन्होंने मुंबई में फिल्मों के होर्डिंग्स पेंट करके की थी। हुसेन ने एक बार अपने शुरुआती जीवन का जिक्र करते हुए बताया था, हमें प्रति वर्ग फुट के चार या छह आना मिलते थे, जिसका मतलब है कि छह गुणा 10 फुट के कैनवास से हमें कुछ रुपये मिलते थे। 

इतनी कम आय को देखते हुए हुसेन ने दूसरे कामों की भी तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान उन्हें खिलौने बनाने के एक कारखाने में काम मिला, जहां उन्हें अधिक राशि मिलने लगी।

हुसेन का हिंदू देवी-देवताओं की पेंटिंग्स को लेकर विवादों से चोली-दामन की तरह का साथ रहा। इसी वजह से उन्हें 2006 में देश भी छोड़ना पड़ा। मां दुर्गा और सरस्वती को लेकर उनकी कलाकृतियों पर हिंदू संस्थाओं ने आपत्ति जताई। इन कलाकृतियों को लेकर उठे विवाद के बाद 1998 में उनके घर पर हिंदू संगठनों ने हमला बोलते हुए उनकी कलाकृतियों की तोड़-फोड़ दिया।

फरवरी, 2006 में हुसेन पर हिंदू देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरों को लेकर लोगों की भावनाएं भड़काने का आरोप लगा। हुसेन के खिलाफ इस आरोप में कई केस चले। ऐसे ही एक अदालती मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट भी जारी हुआ क्योंकि उन्होंने समन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलीं।

हुसेन ने देश छोड़ने के पहले कहा, कानूनी तौर पर मामले इतने जटिल हैं कि मुझे घर न लौटने की सलाह दी गई है। इस बात की आशंकाएं थीं कि उनके लौटने पर उन्हें उनके खिलाफ चल रहे मामलों को लेकर गिरफ्तार कर लिया जाएगा, इसके बाद भी उन्होंने घर लौटने की इच्छा जताई थी।

हुसेन 1940 के दशक के अंत से ही प्रसिद्धि पा चुके थे। वह 1947 में फ्रांसिस न्यूटन सूजा द्वारा स्थापित प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप में शामिल हो गए। यह ग्रुप भारतीय कलाकारों के लिए नई शैलियां तलाशने और बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट द्वारा स्थापित परंपराओं को तोड़ने के इच्छुक युवा कलाकारों के लिए बनाया गया था। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हुसेन भारत के कलाकारों मेंसबसे ज्यादा धन पाने वाले कलाकारों में से एक रहे। उनकी एक कलाकृति क्रिस्टीज की नीलामी में 20 लाख डॉलर में बिकी। 



स्त्रोत नवभारत टाइम्स