अभी अभी ......


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Tuesday, June 8, 2010




मज़ा बरसात का चाहो तो इन आंखों में आ बसो
 वो बरसों में बरसती है ये बरसों से बरसती है...

Sunday, June 6, 2010

पानी,

 
   मैने पापा से पूछा पानी,
पापा ने कहा धरती,
मैने धरती से पूछा पानी ,
धरती ने कहा पेड़,
मैने पेड़ से पूछा पानी
 पेड़ ने कहा हवा
मैने हवा से पूछा पानी
उसने कहा आसमान
मैने आसमान से पूछा
पानी उसने कहा किसान
 मैने किसान से पूछा पानी
उसकी आंखों से दो बूंद उतर आये
क्या हम पानी का अर्थ समझ पाये...

Saturday, June 5, 2010

इलाज....

सुनो मुन्ना को बहुत तेज़ बुखार है कहीं से दवा-दारू का इंतिजाम करों,
कहां से करू अभी तो फूटी कौड़ी भी नहीं है मेरे पास
,जाकर मालिक से ही क्यों नहीं मांग लाते हो ,
अभी तो लाया था बडी मुश्किल से गाली देने के बाद 100 रू दिये थे फिर कैसे जाउ
तो क्या हमारे बेटे के नसीब में इलाज भी नहीं लिखा है ,ठीक एक बार फिर जाता हूं मांग देखता हूं.... बाहर तो ऐसा लगता जैसे आसमान ही फट गया हैं......
फिर आ गया साले रोज रोज पैसा मांगते हुए शर्म नहीं आती देख नहीं रहा है अंदर वीआईपी लोग हैं पार्टी चल रही है और तू अपना मनहूस चेहरा लेकर फिर आ गया चल भाग यहां से ......
और रामू निकाल दिया गया घर से ......
घर लौट कर देखा तो बेटे ने तेज बुखार में ही दम तोड़ दिया ...
बाहर बारिश थम चुकी थी...लेकिम रामू की आंखों में कुछ उतर आया था....