और वास्तविकता के होंठ कभी शहद को चख ना सके
दुखांत यह होता है रात की कटोरी पर से चंद्रमा की कलई उतर जाये
और उस कटोरी में पडी हुई कल्पना कसैली हो जाये
दुखांत यह नहीं होता कि आपकी किस्मत से आपके साजन का नाम पता न पढा जाये
और आपके उम्र की चिट्ठी सदा रूलती रहे
दुखांत यह होता है कि आप अपने प्रिय को अपनी उम्र की सारी चिट्ठी लिख लें
और फिर आपके पास से अपने प्रिय का नाम पता खो जाए
दुखांत यह नहीं होता कि जिंदगी के लंबे डगर पर समाज के बंधन अपने कांटे बिखेरते रहे
और आपके पैरों से सारी उम्र लहूं बहता रहे
दुखांत तो यह होता है कि आप लहु लुहान पैरों से एक जगह खड़े हों जायें
और जिसके आगे से कोई भी रास्ता आपको बुलावा ना दें.....!!!