Monday, August 2, 2010
जीवन
सोचा जाये तो साबत जीना औऱ भीतर बाहर से जीना यह जीने का सबसे सरल तरीका होना चाहिए,क्योंकि यही तरीका सबसे ज्यादा logocal है। पर यह बात समझ में नहीं आई कि यही तरीका सबसे ज्यादा मुश्किल क्यों है? जो तरीका बाकी सारी कायनात जीवन क्रम में कोई रूकावट नहीं डालता ......धूप बिखर जी सकती है,फुल,पेड़,आकाश ,की ओर विकास करके जी सकते है,सहज और सरल।पर उसी तरीके से जब मानव जीना चाहता है तो उसका नतीजा आमतौर पर ट्रेजडी और अकेलापन क्यों होता है?
Saturday, July 31, 2010
वाह रे बेरोजगारी…
नदी में डुबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को
आवाज़ लगायी "बचाओ… बचाओ…"
पुल पर चलते हुए आदमी ने रस्सी फेकी और कहा "आओ…"
नदी में डुबता आदमी रस्सी नही पकड पा रहा था
रह रह कर चिल्ला रहा था
"मै मरना नही चाहता… ज़िन्दगी बडी महंगी है…
कल ही तो मेरी एक MNC मे नौकरी लगी है…"
इतना सुनते ही बचाने वाले आदमी ने रस्सी खींच ली
और भागते हुए MNC कम्पनी पहुचा
उसने वहां की HR Manager को कहा
" अभी अभी आपकी कम्पनी का एक आदमी डुबकर मर गया है
और एक जगह खाली कर गया है… मै बेरोज़गार हु, मुझे ले लो"
HR Manager बोली
"दोस्त्… तुमने कुछ देर कर दी…
हमने पहले ही उस आदमी को नौकरी दे दी है
जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहां आया
आवाज़ लगायी "बचाओ… बचाओ…"
पुल पर चलते हुए आदमी ने रस्सी फेकी और कहा "आओ…"
नदी में डुबता आदमी रस्सी नही पकड पा रहा था
रह रह कर चिल्ला रहा था
"मै मरना नही चाहता… ज़िन्दगी बडी महंगी है…
कल ही तो मेरी एक MNC मे नौकरी लगी है…"
इतना सुनते ही बचाने वाले आदमी ने रस्सी खींच ली
और भागते हुए MNC कम्पनी पहुचा
उसने वहां की HR Manager को कहा
" अभी अभी आपकी कम्पनी का एक आदमी डुबकर मर गया है
और एक जगह खाली कर गया है… मै बेरोज़गार हु, मुझे ले लो"
HR Manager बोली
"दोस्त्… तुमने कुछ देर कर दी…
हमने पहले ही उस आदमी को नौकरी दे दी है
जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहां आया
Thursday, July 29, 2010
वो वक्त पुराना अच्छा लगता है......क्या आपको भी
चर्चाओं में वक्त पुराना अच्छा लगता है
कहीं कहीं पर नया ज़माना अच्छा लगता है
किसी किसी का आना अच्छा लगता है
लेकिन कुछ लोगों का जाना अच्छा लगता है
कभी किसी के सच पर भी विश्वास नहीं होता है
और किसी का सिर्फ बहाना अच्छा लगता है
हमने कई डिग्रियां ले ली पढ़ लिखकर,लेकिन
अब भी दादी का धमकाना अच्छा लगता है
मौटे मोटे धर्मग्रंथ पढ़ने के एवज़ में
बच्चों से दिल बहलाना अच्छा लगता है
तन्हाई की यादों के बादल घिर आने पर
तस्वीरों से दिल बहलाना अच्छा लगता है...
कहीं कहीं पर नया ज़माना अच्छा लगता है
किसी किसी का आना अच्छा लगता है
लेकिन कुछ लोगों का जाना अच्छा लगता है
कभी किसी के सच पर भी विश्वास नहीं होता है
और किसी का सिर्फ बहाना अच्छा लगता है
हमने कई डिग्रियां ले ली पढ़ लिखकर,लेकिन
अब भी दादी का धमकाना अच्छा लगता है
मौटे मोटे धर्मग्रंथ पढ़ने के एवज़ में
बच्चों से दिल बहलाना अच्छा लगता है
तन्हाई की यादों के बादल घिर आने पर
तस्वीरों से दिल बहलाना अच्छा लगता है...
बीता हुआ पल...
नदी घरोंदे खेल -खिलौने बचपन अच्छे लगते थे
वो भी कैसे अच्छे दिन थे धूप के जंगल हंसते थे
मीलों फैले सन्नाटे,जादू ढलती शामों का
रस्ते रस्ते पगडंडी के रह रह घूंघरू बजते थे
दिन कोई बंजारों जैसे आते जाते बस्ती में
रातें जलें अलावों जैसी सुख दुख भीगे किस्से थे
ऋतुएं आंधी पानी जैसी मौसम कई बुजुर्गों से
कुशलक्षेम आते जाते की अक्सर पूछा करते थे
रिश्तों की अपनी परिभाषा पानी था संबंधों का
भोले भाले सीधे साधे लोग आईनों जैसे थे
सबके अपने अपने बोझे एक सोच थी एक सफर
छोटे बड़े पराए अपने सभी एक से दिखते थे
वो भी कैसे अच्छे दिन थे धूप के जंगल हंसते थे
मीलों फैले सन्नाटे,जादू ढलती शामों का
रस्ते रस्ते पगडंडी के रह रह घूंघरू बजते थे
दिन कोई बंजारों जैसे आते जाते बस्ती में
रातें जलें अलावों जैसी सुख दुख भीगे किस्से थे
ऋतुएं आंधी पानी जैसी मौसम कई बुजुर्गों से
कुशलक्षेम आते जाते की अक्सर पूछा करते थे
रिश्तों की अपनी परिभाषा पानी था संबंधों का
भोले भाले सीधे साधे लोग आईनों जैसे थे
सबके अपने अपने बोझे एक सोच थी एक सफर
छोटे बड़े पराए अपने सभी एक से दिखते थे
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