अभी अभी ......


Wednesday, August 4, 2010

देश और बीवी

संवैधानिक मत का अधिकार 18 साल

संवैधानिक शादी का अधिकार 21
इसका मतलब है कि सरकार भी जानती है कि आदमी 18 साल की उम्र में देश तो संभाल सकता है लेकिन बीवी नहीं............

Tuesday, August 3, 2010

ये कोई गैर मामूली बात नहीं

ये कोई गैर मामूली बात नहीं
कि मेरी तलाशी ली गई
औऱ मेरे दिल को मुझसे छीन लिया गया
और न ये कि मुझे निकालनें के लिए
मेरे घर को आग लगा दी गई
औऱ न ये कि
कुत्ते पकडने वाली कैंची
मेरी कमर में फंसा कर
मुझे ट्रक में डाल दिया गया
और न ये कि
जलता हुआ कोयला
अपनी मुट्टी में छुपाकर
मैने पूछा
मेरे हाथ में क्या है
औऱ
तुम कोई जबाब नहीं दे सकी

Monday, August 2, 2010

गा दोगे जो तुम गीत मेरे......

जाने कितने मरने वाले इनसे जीवन पा जायेगें
गा दोगे तुम गीत मेरे तो ये अमुत बन जायेगें
मद मस्त पवन हो जायेगी कोयल सुनकर शरमाएगी
कण कण नर्तन कर झूमेगा,सुर लोक धरा हो जायेगी
गंधर्व अप्सराएं धरती पर,आने को ललचाएगें
गा दोगी जो गीत...
छूकर अपने अधरों से तुम,इन गीतों पावन कर दो
पार्थिव देह में भावों के सांसों का स्पंदन भर दो
वाणी में बंधकर जीते जी,ये तो तर्पण पा जायेगें
गा दोगी जो गीत मेरे तो ये अमृत बन जायेगें..

(यूं ही याद तुम्हारी याद आ गई)

जीवन

सोचा जाये तो साबत जीना औऱ भीतर बाहर से जीना यह जीने का सबसे सरल तरीका होना चाहिए,क्योंकि यही तरीका सबसे ज्यादा logocal  है। पर यह बात समझ में नहीं आई कि यही तरीका सबसे ज्यादा मुश्किल क्यों है? जो तरीका बाकी सारी कायनात जीवन क्रम में कोई रूकावट नहीं डालता ......धूप बिखर जी सकती है,फुल,पेड़,आकाश ,की ओर विकास करके जी सकते है,सहज और सरल।पर उसी तरीके से  जब मानव जीना चाहता है तो उसका नतीजा आमतौर पर ट्रेजडी और अकेलापन क्यों होता है?