अभी अभी ......


Friday, February 4, 2011

मोला झोल्टु-राम बना देहे ओ ।

एती जाथोँ त ओती जाथस, ओती जाथॉ त दोती ओ
एती जाथो त ओती जाथस, ओती जाथॉ त दोती ओ
कोन नजर के जादु मँतर मार देहे मोला ओ , हाय
मोला झोल्टु-राम बना देहे ओ ।
मोला झोल्टु-राम बना देहे ओ


झोल्टु के झोली मा का का चीज, लौँग सुपारी धथूरा के बीज ।
झोल्टु के झोला ला लेगे चोर, झोल्टु कुदावथे धोती छोर ॥
एती देखव ते ओती देखव, ओती देखव ते दोती ओ
छ्त्तीसगढ के मोहनी जरी मोला पिया देहे रे, हाय
मोला सुखडू राम बना देहे ओ
मोला झोल्टु-राम बना देये हो


तोर मया म मै जोगी बनेव, सोला बछर के मै माला जपेँव ।
का कहाव मैं ह काला बताँव, तोला बलावव के ओला बलाँव ॥
तोर मया म मै जोगी बनेव, सोला बछर के मै माला जपेँव ।
का कहाव मैं ह काला सुनाव, तोला बालावव के ओला बलाँव ॥
एती लेजाव कि ओती लेजाव , ओती लेजाव के दोती ओ
सात भाँवर के सात नचनिया, मोला नचा देहे रे , हाय
मोरा फोकटू राम बना देहे ओ
मोरा फोकटू राम बना देहे ओ


तोर जवानी के नशा मोला, गाँजा पीयेँव मे तोला तोला ।
का कहाव मैं ह काला बताँव, तोला बलावव के ओला बलाँव
आरी लेजेव के बारी लेजव , बारी लेजव के दुवारी ओ ।
बत्तीस दिन के खाना पीना मोला छोड़ा देहे ओ , हाय
मोरा फोकटू राम बना देहे ओ


एती देखव त ओती देँखँव, ओती देखँव ते दोती ओ
एती लेजाव कि ओती लेजाव , ओती लेजाव के दोती ओ
कोन नजर के जादु मँतर मार देहे मोला ओ , हाय
मोला झोल्टु-राम बना देहे ओ ।

Wednesday, January 26, 2011

हिंदोस्ताँ कहाँ है अब हिंदोस्तान में ।

ये रोज कोई पूछता है मेरे कान में
हिंदोस्ताँ कहाँ है अब हिंदोस्तान में ।
इन बादलों की आँख में पानी नहीं रहा
तन बेचती है भूख एक मुट्ठी धान में ।
तस्वीर के लिये भी कोई रूप चाहिये
ये आईना अभिशाप है सूने मकान में ।
जनतंत्र में जोंकों की कोई आस्था नहीं
क्या फ़ायदा संशोधनों से संविधान में......!!!

Tuesday, January 25, 2011

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

ाक्या जिंदगी है और भूख है सहारा
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

सौ करोड़ बुलबुले जाने शाने गुलिस्तां थी

उन बुलबुलों के कारण उजडा चमन हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

पर्वत ऊंचा ही सही, लेकिन पराया हो चुका है

न संतरी ही रहा वह,ना पासवां हमारा

गोदी पे खेलती हैं हजार नदियां, पर खेलती नहीं हैं

जो तड़फती ही रहती हैं, कुछ बोलती नहीं हैं,

बेरश्क हुआ गुलशन, दम तोड के हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

अब याद के आलावा गंगा में रहा क्या है

कितनों ने किया पानी पी पी के गुज़ारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

मज़हब की फ्रिक किसको और बैर कब करें हम

है भूखी नंगी जनता गर्दिश में है सितारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

यूनानो, मिश्र, रोमां जो कब के मिट चुके

उस क्यू मे हम खड़े हैं नंबर लगा हमारा

जिंदगी की गाड़ी रेंगती है धीरे धीरे

घर का चिराग अपना, दुश्मन हुआ हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा


(बरबस ही याद हो आया फिर भी मेरा देश महान)

क्या जिंदगी है और भूख है सहारा
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

सौ करोड़ बुलबुले जाने शाने गुलिस्तां थी

उन बुलबुलों के कारण उजडा चमन हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

पर्वत ऊंचा ही सही, लेकिन पराया हो चुका है

न संतरी ही रहा वह,ना पासवां हमारा

गोदी पे खेलती हैं हजार नदियां, पर खेलती नहीं हैं

जो तड़फती ही रहती हैं, कुछ बोलती नहीं हैं,

बेरश्क हुआ गुलशन, दम तोड के हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

अब याद के आलावा गंगा में रहा क्या है

कितनों ने किया पानी पी पी के गुज़ारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

मज़हब की फ्रिक किसको और बैर कब करें हम

है भूखी नंगी जनता गर्दिश में है सितारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

यूनानो, मिश्र, रोमां जो कब के मिट चुके

उस क्यू मे हम खड़े हैं नंबर लगा हमारा

जिंदगी की गाड़ी रेंगती है धीरे धीरे

घर का चिराग अपना, दुश्मन हुआ हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा


(बरबस ही याद हो आया फिर भी मेरा देश महान)