(पिछले कुछ दिनो से एक अजनबी ने बैचेन कर ऱखा है ..इतना प्यारा है कि कुछ इसके सिवा और कह ही नहीं सकता हूं)
गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना सपनों में आज
चांदनी रात में कंचन तन मुख मंडल में सजाना आज
सखी सपनों में मिलना आज
कमल कोंपल से कोमल पांव तेरे
और पथरीले पथ हैं चारो ओर
तू अमुल्य निधि है सृष्टि की
ताक रहे हैं तुझे चित चोर
सबसे सकुचान पर मुझसे नयन मिलाना आज
गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना
कदम बढाना हौले हौले
निज नस नस मे दमकते शोले
चेहरे पे चंद्रमा का भ्रम चकोर भी बोले
सुनकर तेरे पायल की आवाज
कहां छिडी है सरगम आज
सखी मिलना सपनों में आज
गर प्रकट मिलन में आये लाज
गजरे ना लगाना बालों में
कहीं चुरा ना ले केशों की खुशबू
गर होठों हिलें तो ऐसा लगेगा
छेडी है प्रकृति तो ऐसा लगेगा
छेड़ी है प्रकृति ने साज़
गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना सपनों में आज
Sunday, August 22, 2010
कुछ यादों के गीत कुछ गीतों की यादें......
कौन रंग हीरा कौन रंग मोती
कौन रंग ननदी बिरना तुम्हार ?
लाल रंग हीरा पियर रंग मोती
सँवर रंग ननदी बिरना तुम्हार
फूट गए हिरवा बिथराय गए मोती
रिसाय गए ननदी बिरना तुम्हार
बीन लैहौं हीरा बटोर लैहौं मोती
मनाय लैहौं ननदी बिरना तुम्हार
कौन रंग ननदी बिरना तुम्हार ?
लाल रंग हीरा पियर रंग मोती
सँवर रंग ननदी बिरना तुम्हार
फूट गए हिरवा बिथराय गए मोती
रिसाय गए ननदी बिरना तुम्हार
बीन लैहौं हीरा बटोर लैहौं मोती
मनाय लैहौं ननदी बिरना तुम्हार
Saturday, August 21, 2010
किसी रोज़ जिंदगी से मिलायेंगे तुम्हें.......
कभी चाहोगे तो चाहत से बुलाएँगे तुम्हें
दर्द-ए-दिल क्या होता हैये दिखायेंगे तुम्हें
मोहब्बत होती है क्या मोहब्बत कर के देख लेना
फिर मेरे पास आना कुछ और बताएँगे तुम्हें
कभी न आयें आँख में आंसू तो ऐसा करना
एक शाम मेरे पास आना बोहत रुलायेंगे तुम्हें
हर पल रहोगे मुहब्बत में बेचैन
ख्याल बन कर सतायेंगे तुम्हें
पूछते हो जो जिंदा रहने का सबब चलो
किसी रोज़ जिंदगी से मिलायेंगे तुम्हें
दर्द-ए-दिल क्या होता हैये दिखायेंगे तुम्हें
मोहब्बत होती है क्या मोहब्बत कर के देख लेना
फिर मेरे पास आना कुछ और बताएँगे तुम्हें
कभी न आयें आँख में आंसू तो ऐसा करना
एक शाम मेरे पास आना बोहत रुलायेंगे तुम्हें
हर पल रहोगे मुहब्बत में बेचैन
ख्याल बन कर सतायेंगे तुम्हें
पूछते हो जो जिंदा रहने का सबब चलो
किसी रोज़ जिंदगी से मिलायेंगे तुम्हें
Wednesday, August 18, 2010
आप इसे जरूर गुनगुनाएं.........
काहे को ब्याहे बिदेस, अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस
भैया को दियो बाबुल महले दो-महले
हमको दियो परदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
हम तो बाबुल तोरे खूँटे की गैयाँ
जित हाँके हँक जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ
घर-घर माँगे हैं जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
कोठे तले से पलकिया जो निकली
बीरन में छाए पछाड़
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
हम तो हैं बाबुल तोरे पिंजरे की चिड़ियाँ
भोर भये उड़ जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
तारों भरी मैनें गुड़िया जो छोडी़
छूटा सहेली का साथ
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
डोली का पर्दा उठा के जो देखा
आया पिया का देस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
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