अभी अभी ......


Tuesday, September 14, 2010

रोटी छीनकर सेंकते हैं रोटियां वो....................


कॉमनमैन के पैसे से कॉमनवेल्थ गेम्स करा रहे हैं वो....औऱ ये कॉमनवेल्थ गेम्स भ्रष्टाचार की वो कहानी कह रहे हैं जिससे कॉमन मैन का ही भरोसा सरकार से उठता जा रहा है।किसी विदेशी अखबार ने कुछ दिनों पहले ही भारत में हो रहे कॉमन वेल्थ गेम्स में हुए घोटाले को लेकर कहा है कि इस मामले में कम से कम भारत को भ्रष्टाचार का तो गोल्ड़मेडल मिल ही जायेगा। गरीबों की रोटिया छीनकर कॉमनवेल्थ की आड में अपनी रोटियां सेंक रहे इसके सर्वेसर्वा क्या कभी कठघरे में आ पायेगें?आयेगें तो कब आयेगें ? यह सवाल हर किसी के मन में है।अजीब बात है जिन गोरों ने हमें गुलाम बनाया उन्हीं की गुलामी की याद में हम कामनवेल्थ गेम्स के जलसे की मेजबानी कर रहे हैं। जब कॉमन वेल्थ गेम्स की तैयारी की जा रही थी तो इसके उद्देश में कहा गया था समानता मानवता और नियति को उल्लेखित किया गया था लेकिन समझ नहीं आता है कि जिसदेश में 35 करोड जनता भूखी सोती है उस देश में अस्सी हजार करोड का खेल समारोग आयोजित कर कैसे समानता  आएगी और जिनके हाथ भ्रष्टाचार से सने हों यह कैसे मानवता लायेगें। ऐसे में नियति की क्या बात की जाए।कितनी बड़ी विडवना है कि जो सरकार लेह त्रासदी के लिए 125 करोड देती है वही एक स्टेडियम के लिए 300 करोड फूंक देती है।पिछले डेढ साल से तैयारियो कीराग अलापने के बाद भी कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन अधूरे निर्माण कार्यों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।चीन को देखें एशियन गेम्स के 100 दिन पहले से ही वहां पर सारी तैयारियां पूरे हो चुकी थी और हमारे यहां 3 अक्टूबर से शुरू हो रहे  इन खेलों के लिए अभी भी हायतौबा मची हुई है।औऱ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका ये आयोजन सफल हो भी पाता है या नही यह भी भगवान भरोसे है।इन खेलों के लिए आ रहे पैसों की बात करें तो इस पूरे खेल आयोजन में कुल 8324 करोड का अनुदान दिया गया है।महाराष्ट्र सरकार और उसकी शाखा कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स की तरफ से 351 करोड रुपये का अनुदान दिया गया है...दिल्ली सरकार  1770करोड  रूपये व्यय  कर रही है इस आयोजन पर।इसके अतिरिक्त दिल्ली सरकार निर्माण,पानी,यातायात आदि पर भी करोडों रूपये खर्च कर रही है।पूरे आयोजन की तैयारियों पर अब तक कुल 10445 करोड खर्च किया गया है ।तो दूसरी तरफ इन खेलों में हो खर्चें में भ्रष्टाचार का वो रूप सामने आय़ा है जिसने पूरे देश में हल्ला मचा रखा हुआ है।इन खेलों में  भारत की साफ और स्वच्छ तस्वीर दिखाने के चक्कर में दिल्ली में बसे भिखारियों,हाथ ठेले वालो ,रिक्शा चालकों को भगाया जा रहा है कुछ तो रोजाना गायब हो रहे हैं ,रात के अंधेरे में यह काम दिल्ली सरकार के इशारे पर हो रहे किसी को धमकाया जा रहा है तो किसी को पैसों का लालच देकर भगाया जा रहा है लेकिन दूसरे पक्ष पर अभी तक किसी ने भी गौर नहीं किया है और वो इस पूरे खेल के पीछ सक्रिय मानव अंग की तस्करी करने वाले गिरोह .................इस पूरे मामले मे देखा जाये तो सरकार कह रही है कि लोग गायब नहीं हुए बल्कि यहां से बाहर भेज दिये गये ..........पर मामला पूरी तरह से साफ हो ऐसा भी नहीं लग रहा है। सरकार के इशारे पर हो रहे इन देश निकाला खेल पर भी एक बडेखुलासे की जरूरर हो सकती है.........औऱ वो दिन भी दूर नहीं होगा जब किसी दिन अचानक इस खबर पर भी बवाल मच जाये....।पहली बार दिल्ली में आयोजित इन खेलों को लेकर सरकार ने अब तक दस हजार करोड रूपये से भी ज्यादा पैसा फूंक चुकी है......लेकिन कहां किसी को नहीं पता ............बाजार में मिलने वाली 1.60 हजार की ट्राली बेड को इन खेलों के लिए पौने तीन लाख में खरीदा गया...........शिफ्टिगं ट्राली की कीमत बाजार में 40 हजार तो इन खेलों के लिए इसे 72 हजार में खरीदा गया है......जिसकी कीमत जिसकी कीमत एक करोज 77 लाख है।दोनो ट्राली को मिलाकर सरकार ने कुल 124 ट्राली बेग और 36 शिफ्टिंग ट्राली खरीदी है..........सिर्फ इन दोनो की खरीदी पर ही सरकार  ने जनता तीन करोड रूपये से भी ज्यादा का चूना लगाया है। यानि की यदि पूरे आयोजन पर की खरीदी की व्याख्या  की जाये तो  यह कहा जा सकता है यह कॉमन वेल्थ गेम्स नही बल्कि गेम ऑफ वेल्थ ज्यादा सटीक है......

4 comments:

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

sunil patel said...

बिलकुल सत्य कह रहे है. अंग्रजो ने भी जिस बेदर्दी से हमारे देश को नहीं लूटा उससे ज्यादा अंधेरगर्दी, लापरवाही, भ्रष्टाचार कोम्मोंवेअल्थ गेम में हुआ है. इससे करोडो लोगो को रोजगार मिल जाता. खिलाडियो पर खर्च होता तो सकडो पदक ओल्य्म्पिक में मिल जाते. किन्तु गुलामी को सलाम करना जो है.
लिखते रहिये. धन्यवाद.

sunil patel said...

बिलकुल सत्य कह रहे है. अंग्रजो ने भी जिस बेदर्दी से हमारे देश को नहीं लूटा उससे ज्यादा अंधेरगर्दी, लापरवाही, भ्रष्टाचार कोम्मोंवेअल्थ गेम में हुआ है. इससे करोडो लोगो को रोजगार मिल जाता. खिलाडियो पर खर्च होता तो सकडो पदक ओल्य्म्पिक में मिल जाते. किन्तु गुलामी को सलाम करना जो है.
लिखते रहिये. धन्यवाद.

acharyakeshav said...

धन्यवाद शिवम जी और सुनील बाबू उम्मीद है आगे भी आपसे उत्साह मिलता रहेगा