अभी अभी ......


Monday, August 23, 2010

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया,
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया ॥




महर-महर ममहावत हाबे धनहा खेत के माटी ह,
सुवा ददरिया गावत हाबे, खेतहारिन के साँटी ह ॥
उबुक-चुबूक उछाल मारे गाँव के तरिया,
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया ॥




फोरे के तरिया खेते पलोबो , सोन असन हम धान उगाबो ,
महतारी भुईया ले हमन , धान पाँच के महल बनाबो ।
अड़बड़ बियापे रिहिस , पौर के परिया , बादल करिया ।
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया

5 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया रचना ....

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

अरे वाह भाई......

एसो के सावन हमर छत्‍तीसगढ़ म झमा झम बरसे हे, खेत खार सब लबा लब भरे हे, निंदई गुडई होके बियासी के रद्दा देखत हंन.

जय जोहार.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

बढि़या काम करत हस गा भाई, हमर भाखा के महक ला चारो मुडा बगरावत हस, आपका बहुत बहुत धन्‍यबाद.

ali said...

सुन्दर !

acharyakeshav said...

जय जोहार