अभी अभी ......


Monday, August 23, 2010

ये गजब लागे सँगी , जेमा मिरी के बरदान

करेला असन करू होगे का ओ तोर मया
ये सनानना करेला असन करू होगे य मोर मया
करेला असन करू होगे का ओ, करेला असन करू होगे का य मोर मया
ये सनानना करेला असन करू होगे य मोर मया


हाय रे तिवरा के ड़ार , टुरी तेल के बघार
ये गजब लागे वो गजब लागे
ये गजब लागे सँगी , जेमा मिरचा मारे झार
गजब लागे,
ये सनानना करेला असन करू होगे य तोर मया


हाय रे धनिया के पान, मिरी बँगाला मितान
गजब लागे वो , गजब लाबे
ये गजब लागे वो ये गजब लागे
ये गजब लागे सँगी , जेमा मिरी के बरदान
गजब लागे,
ये सनानना करेला असन करू होगे य तोर मया


हाय रे जिल्लो के भाजी, खाय बर डौकी डौका राजी
ये गजब लागे वो गजब लागे
ये गजब लागे सँगी , जेमा सुकसी मारे बाजी
गजब लागे,
ये सनानना करेला असन करू होगे य तोर मया

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया

एसो के सावन मे जम के बरस रे बादर करिया,
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया ॥




महर-महर ममहावत हाबे धनहा खेत के माटी ह,
सुवा ददरिया गावत हाबे, खेतहारिन के साँटी ह ॥
उबुक-चुबूक उछाल मारे गाँव के तरिया,
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया ॥




फोरे के तरिया खेते पलोबो , सोन असन हम धान उगाबो ,
महतारी भुईया ले हमन , धान पाँच के महल बनाबो ।
अड़बड़ बियापे रिहिस , पौर के परिया , बादल करिया ।
यहू साल झन पर जाय हमर खेत ह परिया ॥

पता दे जा रे, पता ले जा रे गाड़ी वाला

हो गाड़ी वाला रे ..
पता दे जा रे, पता ले जा रे गाड़ी वाला
पता दे जा, ले जा गाड़ी वाला रे
तोर गांव के तोर काम के
तोर नाम के पता दे जा
पता ले जा रे
पता दे जा रे गाड़ी वाला
का तोर गांव के नाव दिवाना डाक खाना के पता का
नाम का थाना कछेरी के तोरे
पारा मोहल्ला पता का
को तोरे राज उत्ती बुड़ती रेलवाही पहार सड़किया
पता दे जा रे पता ले जा रे गाड़ी वाला
मया नई चिन्हे देसी बिदेसी मया के मोल न तोल
जात बिजाति न जाने रे मया, मया मयारु के बोल
काया-माया सब नाच नचावे मया के एक नजरिया
पता दे जा रे
पता ले जा रे गाड़ीवाला..
जीयत जागत रहिबे रे बैरी
भेजबे कभुले चिठिया
बिन बोले भेद खोले रोवे, जाने अजाने पिरितिया
बिन बरसे उमड़े घुमड़े ,जीव मया के बैरी बदरिया
पता दे जा रे
पता ले जारे गाड़ी वाला ...
पता दे जा, ले जा गाड़ी वाला रे
तोर गांव के तोर काम के
तोर नाम के पता दे जा
हो गाड़ी वाला रे ..

Sunday, August 22, 2010

सखी मिलना सपनों में आज

 (पिछले कुछ दिनो से एक अजनबी ने बैचेन कर ऱखा है ..इतना प्यारा है कि कुछ इसके सिवा और कह ही नहीं सकता हूं)



गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना सपनों में आज
चांदनी रात में कंचन तन मुख मंडल में सजाना आज
सखी सपनों में मिलना आज

कमल कोंपल से कोमल पांव तेरे
और पथरीले पथ हैं चारो ओर
तू अमुल्य निधि है सृष्टि की
ताक रहे हैं   तुझे चित चोर
सबसे सकुचान पर मुझसे नयन मिलाना आज
गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना

कदम बढाना हौले हौले
निज नस नस मे दमकते शोले
चेहरे पे चंद्रमा का भ्रम चकोर भी बोले
सुनकर तेरे पायल की आवाज
कहां छिडी है सरगम आज
सखी मिलना सपनों में आज
गर प्रकट मिलन में आये लाज

गजरे  ना लगाना बालों में
कहीं चुरा ना ले केशों की खुशबू
गर होठों हिलें तो ऐसा लगेगा
छेडी है प्रकृति तो ऐसा लगेगा
छेड़ी है प्रकृति ने साज़
गर प्रकट मिलन में आये लाज सखी मिलना सपनों में आज