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Friday, February 19, 2010

भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन



तीन दिवसीय भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन का आज समापन हो गया।पूरे देश से भाजपा के दिग्गज नेताओं और कार्यक्रताओं का जमावाड़ा इंदौर के ओमेक्श सिटी में बने ठाकरे ग्राम में लगा रहा...।कई नेता कई रंग ....।हर तरफ सारा माहौल जैसे इस अधिवेशन के बाद  भाजपा का काया कल्प होकर ही रहेगा...।लेकिन हकीकत तो कुछ औऱ ही निकल आई..।ऐसे समय में जब पूरे देश में सादगी की लहर चल रही हो तो बावजूद इसके भाजपा ने अपने सादगी के वायदों के इतर करोड़ों रूपयों को पानी की तरह बहा ड़ाले।पूरे शहर को भाजपा के झंड़े और बैनरों से पाट ड़ाला गया....हर चौराहे हरमोड़ पर भाजपा के नेताओं के होर्ड़िग्स नज़र आते रहे... एसी, कम्प्यूटर, नकली पेड़ पौधे, लाखों के तंबू पर खर्च का अंदाजा लगाएं तो ये करोड़ों में बैठता है...यानि सादगी की रट जो बीजेपी ने महीने भर से लगा रखी थी, वो इस अधिवेशन में ढकोसला ज्यादा नज़र आई....।बात सादगी की हो रही थी लेकिन पूरे परिसर को हाईटेक बनाया गया...पूरे क्षेत्र को वाईफाई जोन में तब्दील कर दिया गया...बड़े नेताओं के साथ उनके लैपटाप होंगे तो वाई-फाई सिस्टम का होना भी जरूरी है ना भाई..इतना ही नहीं इस अधिवेशन में बाल श्रम का कानून भी ताक पर रख दिया...अधिवेशन का तैयारी के लिए बच्चों से भी दिन-रात काम कराया गया...नवअध्यक्ष गडकरी का कहना है कि वे समाज के हर व्यक्ति का भला करना चाहते हैं...पर इस अधिवेशन में उनकी कथनी करनी साफ़ नज़र आ गई..। बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का अधिवेशन...तंबू अधिवेशन के नाम से ज़्यादा लोकप्रिय रहा। यहां लगाए तंबूओं के माध्यम से बीजेपी खुद को आम आदमी की पार्टी दिखाने की कवायद करती रही। यूं तो भारतीय जनता पार्टी सख्त अनुशासन वाली पार्टी कहलाती है...लेकिन इंदौर में हकीकत कुछ और नज़र आई है... अधिवेशन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकारी ने सभी नेताओं को तंबू में रुकने के सख्त निर्देश दिये थे...लेकिन कई नेताओं को तंबू रास नही आए और वे पहुंच गये आलीशान होटलों में....।यानी की कहते रहो जो कहना है हम तो अपने में ही भले...।

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