अभी अभी ......


Wednesday, August 11, 2010

हमने चाहा है तुम्हे

हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह
हमसे ना रूठो करो शौक गिजालों की तरह
तेरी जुल्फें तेरे लब,तेरी आंखों के पैमाने
अब भी मशहूर हैं दुनियां में मिशालों की तरह
और क्या इससे ज्यादा कोई नरमी बरतूं
दिल के जख्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह

1 comment:

अपनी बात said...

वाह तो आशिकी वाली शायरी भी,
बहुच खूब।